देहरादून: उत्तराखंड हैंडबॉल टीम को 26 नवंबर से आंध्र प्रदेश में सीनियर महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप होनी है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड की टीम को भी हिस्सा लेने जाना है। लेकिन, उनके सपने खेलने से पहले ही टूट रहे हैं। या कहें कि उनको बिना खेले ही प्रतियोगिता से बाहर करने के लिए छोड़ दिया गया है। प्रतियोगिता के लिए हैंडबॉल एसोसिशन ने ट्रेन में रिजर्वेशन के लिए आवेदन किया, लेकिन सीटें कंफर्म नहीं हो पा रही हैं।

इसके चलते उत्तराखंड हैंडबॉल एसोसिएशन ने टीम को खेलने नहीं जाने के लिए कह दिया गया है। आप सोच सकते हैं कि जिस प्रतियोगिता का खिलाड़ी पिछले दो साल से इंतजार कर रहे थे। कड़ा अभ्यास कर रहे थे, उसमें उनको शामिल होने का सपना टूटने की कगार पर है। सवाल यह है कि क्या खेल विभाग खिलाड़ियों को आंध्र प्रदेश नहीं पहुंचा सकता। क्या रेलवे में उनके लिए सीटों का प्रबंध नहीं किया जा सकता? अगर कोई विकल्प नहीं बचता, तो क्या उनको हवाई सेवा से प्रतियोगिता में नहीं पहुंचाया जा सकता? सरकार चाहे तो यह सब संभव है।

इस टीम को उत्तराखंड की तरफ से आंध्र प्रदेश में होने वाली हैंडबाल चौंपियनशिप में खेलने के लिए 24 नवंबर को यहां से रवाना होना है, लेकिन ट्रेन में वेटिंग लिस्ट अधिक होने के कारण खिलाड़ियों की सीट कंफर्म नहीं हो पाई है। कोरोना के बाद से नेशनल लेबल की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। दो वर्षों से प्रतियोगिता के लिए पूरे उत्साह के साथ तैयारी कर रही थी। टीम का जाना कैंसिल होने के बाद खिलाड़ियों का उत्साह कम हो गया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून की खिलाड़ी रिशिता गुप्ता ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से सीटें कंफर्म न होने को वजह बताते हुए ले जाने से मना कर दिया गया है। रिशिता ने बताया, कोरोनाकाल से इस घड़ी का इंतजार पूरी टीम कर रही थी, लेकिन अब सपना पूरी तरह से टूटता नजर आ रहा है। राज्य के कई जिलों से लड़कियां इस टीम में हैं, जो आंध्र प्रदेश में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी, लेकिन अब यह सपना टूट जाएगा।

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