हरिद्वार: पूर्व सीएम हरीशा रावत ने पिछले दिनों राजनीति से दूर रहने को लेकर एक पोस्ट की थी। लेकिन, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उनको बहुत जल्द वापस लौटना पड़ा। हरदा लौटे भी तो धरने की प्लानिंग के साथ। पिछले दो दिनों से पूर्व सीएम हरीश थाने में ही धरने पर डटे हैं। हरदा ने यह भी कहा है कि हरिद्वार ने मुझे नया जीवन दिया तो मैं सोचता हूं कि समय आ गया है बजाय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को तकलीफ देने के, मैं ही अपने जीवन को अर्पित करूं। देखता हूं एक बार मुख्यमंत्री की भी परीक्षा कर लेते है कि वो मानवीय दृष्टि से सोचते हैं या विशुद्ध तौर से राजनीतिक दृष्टि से सोचते हैं!

हरदा का धरना प्रदर्शन हमेशा ही आत प्रदर्शनों से अलग होता है। वो कुछ ऐसा करते हैं कि सुर्खियां बन ही जाती हैं। बहादराबाद थाना परिसर में धरने पर डटे पूर्व सीएम हरीश रावत ने थाने में सुबह नींद टूटते ही सबसे पहले भजन बजाए और भजनों की धुन पर योग करने लगे। योग करने वाली उनकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं।

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पूर्व सीएम पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। यह धरना हरिद्वार ग्रामीण विधायक पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने शुरू किया था। हरदा भी बेटी का साथ देने पहुंच गए। एक दिन पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने में बार भैंसों के साथ धरना दिया था।

हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत, ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर और भगवानपुर विधायक ममता राकेश ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बहादराबाद थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया था। विधायकों का आरोप है कि पंचायत की मतगणना के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। उन पर दर्ज मुकदमे निरस्त करने की मांग की है।

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पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि अब या तो हरिद्वार से उनका शव जाएगा या फिर कार्यकर्ताओं के ऊपर दर्ज मुकदमे निरस्त होंगे। अगर जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए हरकी पैड़ी के सामने लेटकर अपने प्राण भी दे दूंगा। भाजपा सरकार जानबूझकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में हुई धांधली जगजाहिर है। वह अपनी लड़ाई लोकतंत्र की बहाली के लिए जारी रखेंगे। कहा कि कई जनप्रतिनिधि उनकी जानकारी में ऐसे हैं, जिन्हें धमकाकर भाजपा में शामिल किया गया है।

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