Uttarakhand News: उत्तराखंड के कुछ स्कूलों में गुरुवार 24 नवंबर को छुट्टी रहेगी। इस बाबत सीईओ ने आदेश जारी किया है। नरेंद्र नगर मुख्य शिक्षा अधिकारी एलएम चमोला के आदेशानुसार, ‘श्री गुरू कैलापीर बग्वाल बलराज मेला’ के आयोजन के उपलक्ष में तहसील घनसाली एवं बालगंगा क्षेत्रान्तर्गत सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में स्थानीय अवकाश रहेगा।

बूढ़ाकेदार में मंगशीर की दीपावली के साथ गुरु कैलापीर मेला

भिलंगना ब्लॉक के बूढ़ाकेदार में मंगशीर की दीपावली के साथ गुरु कैलापीर मेला धूमधाम से मनाई जाएगी। तीन दिवसीय मेला गुरुवार से शुरू होगा। सरकारी विभागों की ओर से स्टॉल लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

मुख्य दीपावली के एक माह बाद मंगशीर की दीपावली

आपको बता दें कि, मुख्य दीपावली के एक माह बाद टिहरी जिले में भिलंगना ब्लॉक के थाती कठूड पट्टी, उत्तरकाशी जिले की नल्डा तथा गाजणा पट्टी के लोग धूमधाम से मंगशीर माह में दीपावली मनाते हैं।

मंगशीर दिवाली को लेकर यह है पौराणिक मान्यता

गुरु कैलापीर मेला समिति के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि मुख्य दीपवाली के समय गढ़वाल के राजा और गोरखा राजा के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध शुरू होने से पूर्व कैलापीर देवता गढ़वाल के राजा के सपने में आये और उन्हें आदेश दिया था कि प्रत्येक परिवार के मुखिया को वह अपने साथ लड़ाई में ले जाए, तभी जीत होगी। करीब एक माह तक चली और लड़ाई में गढ़वाल के राजा की जीत हुई। दीपावली के एक माह बाद राजा और उनके सैनिक वापस लौटे, जिसके बाद से मंगशीर माह में दीपावली मनाई जाती है।

गुरु कैलापीर देवता को लेकर यह है मान्यता

बूढ़ाकेदार में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर भी है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को भगवान शिव ने बूढ़ाकेदार में बूढ़े बाबा के रूप में दर्शन दिये थे। ऐसी मान्यता भी है, कि भगवान शंकर के त्रिशूल को पौराणिक काल में ‘गुरु कैलापीर देवता’ का नाम दिया गया था। कैलापीर देवता टिहरी और उत्तरकाशी जिले के कई गांव के ईष्ट देवता हैं। गुरु कैलापीर मेले के पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालु देवता के निशान के साथ खेतों में दौड़ लगाएंगे और देवता का आशीर्वाद लेंगे।

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