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June 19, 2024

Kedarnath Dham : विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर का गर्भगृह आज स्वर्णमंडित हो गया है। 550 सोने की परतों से गर्भगृह की दीवारों और छत को नया स्‍वरूप दिया गया है। महाराष्ट्र के एक दानी के सहयोग से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने यह कार्य किया है।

बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि, केदारनाथ धाम के गर्भगृह की दीवारों और छत को 3 दिन में 19 कारीगरों द्वारा 550 सोने की परतों से सजाया गया है।

महाराष्ट्र के एक दानदाता के सहयोग से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने यह कार्य किया है। इन परतों को नई दिल्ली से पुलिस की कड़ी सुरक्षा में गौरीकुंड पहुंचाया गया था। इससे पहले मंदिर के गर्भगृह, जलेरी व छत चांदी की परतें लगीं थीं। मंदिर समिति के अधिकारियों की मौजूदगी में चांदी को हटाने के बाद मंदिर के भंडार गृह में सुरक्षित रख दिया गया। उसके बाद चांदी के स्थान पर तांबा लगाया गया।

गर्भगृह की दीवारों पर तांबा चढ़ाने के बाद नाप लिया गया और फिर से इस तांबे को निकालकर वापस महाराष्ट्र ले जाया गया, जहां तांबे की परत की नाप पर सोने की परत तैयार की गई। गौरीकुंड से 18 घोड़ा-खच्चरों से सोने की 550 परतें तीन दिन पूर्व केदारनाथ पहुंचाई गई थी।

आईआईटी रुड़की, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की और एएसआई की 6 सदस्यीय टीम ने धाम का निरीक्षण किया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान व केंद्रीय भवन अनुसंधान रुड़की और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में बीकेटीसी ने गर्भगृह, जलेरी व छत पर सोने की परतें लगाने का कार्य किया। इस कार्य में 19 मजदूर लगे हुए हैं। एएसआई के दो अधिकारियों की देखरेख में बुधवार सुबह आखिरी चरण का कार्य पूरा कर दिया गया।

बता दें कि, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 27 अक्टूबर बृहस्पतिवार को प्रात: साढे आठ बजे शीतकाल हेतु बंद हो जाएँगे। कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत आज केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली को विधि-विधान से मंदिर परिसर में लाया गया। मंदिर की परिक्रमा के बाद डोली को मंदिर के अंदर प्रतिष्ठित कर दिया गया। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली कल प्रथम पड़ाव रामपुर हेतु रवाना होगी। 28 अक्टूबर को पंचमुखी डोली द्वितीय पड़ाव श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 29 अक्टूबर को पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी।

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