देहरादून : राज्य में सड़क हादसों में हर रोज किसी न किसी की जान जाती रहती है। हादसों का ये सिलसिला पहाड़ से लेकर मैदान तक लगातार जारी है। एक उत्तराखंड की सड़कें बेहद खतरनाक और जानलेवा हैं। यह हम ऐसे ही नहीं कह रहे बल्कि, सड़क हादसों में मरने वालों का आंकड़ा इस बात की गवाही दे रहा है कि सड़कें कितनी जानलेवा हैं। लेकिन, सवाल यह है कि क्या केवल सड़कें ही खतरनाक हैं या फिर लोग भी लापरवाह हैं।

सड़क हादसों का आलम यह है कि हर दिन कोई न कोई हादसा होता ही रहता है और किसी न किसी की जान जाती ही रहती है। सड़क हादसों का यह सिलसिला आज से नहीं बल्कि, कई सालों से चल रहा है। हर हादसे के बाद सरकार और जिम्मेदार विभागों के अधिकारी हादसों को रोकने के लिए कदम उठाने के दावे करते हैं। लेकिन, जैसे ही लोग हादसे को भूल जाते हैं। अधिकारी भी अपने कदमों को पीछे खींच लेते हैं।

राज्य की बात करें तो पिछले 14 महीनों में एक-दो नहीं बल्कि 1138 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है। यानी औसतन हर दिन 80 से ज्यादा लोगों की जान सड़क हादसों में चली जाती है।

पिछले 14 महीनों में हुए 1922 हादसों में 1558 लोग घायल हुए। इन घायलों में कई ऐसे भी हैं जो जीवन भर के लिए अपंग हो गए और जिनका जीने का भी कोई सहारा नहीं बचा। 2021 में 1405 हादसों में 820 लोगों की मौत हुई है। अधिकांश हादसों की वजह ओवर स्पीड बताई गई है।

2020 में प्रदेश में कुल 1041 हादसे हुए हैं, जिसमें 674 लोगों की मौत हुई है। इसमें ओवर स्पीड से 671 हादसे हुए हैं, जिसमें 430 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2021 में कुल 1405 हादसे हुए हैं, जिसमें 820 लोगों की मौत हुई है।

इसमें 1079 यानि 77 फीसदी हासदे ओवर स्पीड की वजह से हुए हैं, जिसमें 582 लोगों की मौत हुई है।

इस साल 517 हादसे

जहां तक वर्ष 2022 के बात है, तो इस साल अप्रैल महीने तक की 517 सड़क हादसे हो चुके हैं और इन हादसों में 318 लोगों की जान जा चुकी है। पौड़ी जिले में हुए हादसे में 25 लोगों की जानें चली गई।

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